
*बिहार के 211 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेजों में शिक्षा प्रारंभ होने के अवसर पर बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार का संबोधन*
आदरणीय उपस्थित जनप्रतिनिधिगण, शिक्षाविद्, प्राचार्यगण, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएँ तथा बिहार की जागरूक जनता,
आज का दिन बिहार के शिक्षा इतिहास में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। राज्य के 211 प्रखंडों में स्थापित नए डिग्री कॉलेजों में आज से हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई प्रारंभ हो रही है। यह केवल नए कॉलेजों का उद्घाटन नहीं है, बल्कि ज्ञान, अवसर और आत्मनिर्भरता के नए युग का शुभारंभ है।
मैं बिहार सरकार, शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालयों, शिक्षकों और उन सभी लोगों को हार्दिक बधाई देता हूँ जिनके अथक प्रयासों से यह ऐतिहासिक कार्य संभव हुआ है।
भारत की संस्कृति में शिक्षा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उपनिषदों में कहा गया है—
*”सा विद्या या विमुक्तये।”*
अर्थात् वही विद्या है जो मनुष्य को अज्ञान, भय और बंधनों से मुक्त करे।
महाकवि कालिदास ने कहा है—
*”विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्।”*
अर्थात् विद्या मनुष्य का सबसे बड़ा सौंदर्य और ऐसा धन है जिसे कोई चुरा नहीं सकता।
स्वामी विवेकानंद का अमर संदेश है—
*”शिक्षा मनुष्य के भीतर निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति है।”*
डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कहा था—
*”शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।”*
आज बिहार उसी शिक्षा के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
*प्रिय विद्यार्थियों,*
जब शिक्षा गाँव तक पहुँचती है तो केवल एक छात्र नहीं पढ़ता, बल्कि पूरा समाज जागृत होता है। पहले उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को दूर-दराज़ के शहरों में जाना पड़ता था। आर्थिक कठिनाइयों के कारण अनेक प्रतिभाएँ बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती थीं। अब अपने ही प्रखंड में डिग्री कॉलेज उपलब्ध होने से हजारों युवाओं, विशेषकर बेटियों को उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा।
*इन नए कॉलेजों से अनेक लाभ होंगे—*
उच्च शिक्षा की पहुँच गाँव-गाँव तक होगी।
छात्राओं की शिक्षा को नई गति मिलेगी।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का खर्च कम होगा।
स्थानीय स्तर पर रोजगार और शैक्षणिक वातावरण विकसित होगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मजबूत आधार तैयार होगा।
सामाजिक चेतना, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक समझ का विस्तार होगा।
हिंदी हमारी आत्मा की भाषा है, अंग्रेजी वैश्विक अवसरों का माध्यम है, इतिहास हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है, अर्थशास्त्र विकास का मार्ग दिखाता है, राजनीति विज्ञान लोकतंत्र की समझ विकसित करता है और समाजशास्त्र समाज को समझने की दृष्टि देता है। इन विषयों का अध्ययन केवल डिग्री प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि एक जागरूक नागरिक बनने के लिए आवश्यक है।
बिहार सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, छात्रावासों, पुस्तकालयों, डिजिटल शिक्षा, छात्रवृत्तियों तथा आधारभूत संरचना के विकास की दिशा में अनेक महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। आज का यह कदम उसी संकल्प की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
हमारे संविधान के निर्माताओं ने भी शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना है। लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब उसके नागरिक शिक्षित, जागरूक और उत्तरदायी हों।
*आज मैं युवाओं से कहना चाहता हूँ—*
पुस्तकें केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली मित्र हैं।
कबीरदास जी ने कहा है—
*”गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाय।*
*बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥”*
*शिक्षक का सम्मान और ज्ञान का आदर ही राष्ट्र निर्माण का सबसे सशक्त आधार है।*
*कविता*
चलो ज्ञान की राह पकड़ें,अंधियारे से नाता तोड़ें।
हर प्रखंड में दीप जले अब,शिक्षा से भविष्य को जोड़ें।
हर बेटी अब आगे बढ़ेगी,हर बेटा भी ऊँचा उड़ जाएगा।जब-जब शिक्षा घर पहुँचेगी,बिहार नया इतिहास बनाएगा।
*प्रेरक पंक्तियाँ*
जहाँ किताबों का सम्मान होता है,वहीं समाज महान होता है।
जहाँ शिक्षा का दीप जलता है,वहीं विकास का सूरज निकलता है।
कलम की ताकत तलवार से बड़ी होती है,ज्ञान की विजय सदा स्थायी होती है।
*प्रिय विद्यार्थियों,*
आप केवल अपने परिवार की आशा नहीं हैं, बल्कि बिहार और भारत के भविष्य हैं। अनुशासन, परिश्रम, संस्कार और राष्ट्रभक्ति के साथ अध्ययन करें। अपने ज्ञान का उपयोग समाज, राज्य और राष्ट्र के विकास में करें।
आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें—
*हर घर शिक्षा, हर हाथ किताब,*
*यही बनेगा विकसित बिहार का जवाब।*
*ज्ञान बढ़े, सम्मान बढ़े,हर युवा की पहचान बढ़ेl*
*शिक्षित बिहार, समृद्ध बिहार,यही हमारा महान विचार।*
इसी विश्वास के साथ मैं राज्य के सभी नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं, शिक्षकों तथा अभिभावकों को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि ये नए डिग्री कॉलेज बिहार के विकास, सामाजिक परिवर्तन और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मील का पत्थर सिद्ध होंगे।
जय हिंद!जय बिहार!
त्रिलोकी नाथ डिस्ट्रिक्ट रिपोर्टर गयाजी बिहार
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